एक बहन की चिट्ठी प्यारे भैया, दो पल
को ही मेरे
घर तुम आ
जाना....
माँ बाबा का हाल है कैसा, आकर
जरा बता जाना....
आँगन मेरा महक उठेगा, मायके की मिट्टी पाकर....
घर मेँ माँ बाबा को सुनाना,
मेरी ये
चिट्ठी जाकर....
आओगे जब मिलने मुझसे,
माँ का संदेशा ले
आना.... बाबा का दुलार भी मुझको,
आकर तुम ही दे
जाना....
भैया मैँने प्यारी सी एक,
राखी मँगवाकर
रखी है.... अब के बरस तुम आओगे, ये आस
लगाकर रखी है.... प्यारे भैया, पता है मुझको काम
बहुत
ही ज्यादा है....
लेकिन राखी पर आने का, मुझसे
भी किया इक
वादा है.... अब के बरस भी पलकेँ बिछाए,
बाट
तुम्हारी देखूंगी....
हाथोँ मेँ इक थाल सजाए,
दरवाजे पर बैठूंगी....
वादा करो कि अबकी बार, राखी पर तुम
आओगे....
साथ मेँ अपने मेरी प्यारी,
भाभी को भी लाओगे.... धन दौलत की चाह
नहीँ है, न
हीरे जवाहरात
की....
आँखेँ मेरी प्यासी हैँ, बस तुमसे
मुलाकात की..
Sunday, 10 August 2014
राखी का त्यौहार
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